Karl Marx In Hindi कार्ल मार्क्स की जीवनी और मार्क्सवाद

Karl Marx In Hindi पोस्ट में कार्ल मार्क्स की जीवनी (Karl Marx Biography In Hindi) और मार्क्सवाद (Marxism In Hindi) के बारे में जानकारी है। कार्ल मार्क्स एक प्रसिद्ध दार्शनिक, इतिहासकार और अर्थशास्त्री थे। कार्ल मार्क्स के विचारों हर दौर में अध्ययन किया गया है। इन्ही महान दार्शनिक, राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री कार्ल मार्क्स की जीवनी (Karl Marx Ki Jivani) पर विस्तृत चर्चा यहां पर करने का प्रयास है। समाजवाद की नींव डालने का श्रेय भी कार्ल मार्क्स को जाता है।

Karl Marx In Hindi

दुनिया के मजदूरों एकजुट हो जाओ, तुम्हारे पास सिवाय अपनी जंजीरों के खोने को कुछ भी नही है – कार्ल मार्क्स

कार्ल मार्क्स की जीवनी Karl Marx Biography In Hindi –

कार्ल मार्क्स (Karl Marx In Hindi) का जन्म वर्ष 5 मई, 1818 में ट्रायर, जर्मनी में हुआ था। उनका पूरा नाम “कार्ल हेनरिक मार्क्स” था। कार्ल मार्क्स का परिवार यहूदी था। उनके पिता का नाम हेनरिक मार्क्स था जो पेशे से वकील थे। पिता ने कार्ल के जन्म से पहले ईसाई धर्म कबूल कर लिया था। कार्ल मार्क्स को “कम्युनिस्ट विचारधारा” का जनक भी माना जाता है। कार्ल मार्क्स की विचारधारा क्रांतिकारी थी। शासक वर्ग के विरुद्ध उन्होंने कई आंदोलन किये थे।

उनकी प्रारंभिक शिक्षा ट्रायर के जिम्नेजियम नामक स्कूल में हुई थी। कार्ल मार्क्स ने बर्लिन विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र की पढ़ाई की थी। वर्ष 1835 में उन्होंने बॉन विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया जहां पर उन्होंने कानून का अध्ययन किया था। कार्ल मार्क्स का विवाह वॉन वेस्टफेलन के साथ हुआ था जिनसे उन्हें 3 जीवित संताने थी।

जर्मनी में उन्होंने सरकार के विरुद्ध आवाज उठाई जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा था। सरकार के खिलाफ उग्र क्रांतिकारी विचारों के कारण उन्हें जर्मनी से निष्कासित कर दिया गया। निष्कासन के बाद कार्ल मार्क्स फ्रांस आ गए। फ्रांस में उनकी मुलाकात फ्रेडरिक एंजिल्स से हुई जिनके साथ मिलकर उन्होंने फ्रांस में भी सामजवाद की क्रांति लाने का कार्य किया। परन्तु यहां से भी उन्हें निष्कासित कर दिया गया। वर्ष 1849 में कार्ल मार्क्स लंदन आ गए, यही पर उन्होंने बाकि का जीवन व्यतीत किया था।

लोकतंत्र समाजवाद का रास्ता है – कार्ल मार्क्स

मार्क्सवाद क्या है Marxism In Hindi –

कार्ल मार्क्स (Karl Marx) के सिद्धांतों को मार्क्सवाद कहा जाता है। उन्होंने दर्शन, विज्ञान, राजनीति, अर्थशास्त्र इत्यादि पर अपने विचार बताये थे। उनके विचारों को मार्क्सवाद और इन विचारों का समर्थन करने वाला मार्क्सवादी कहलाता है। उन्होंने अमीर और गरीब के बीच परिभाषा बताई थी। उनके अनुसार प्रबल समुदाय काम करने वाले समुदाय पर नियंत्रण रखता है।

समाजवादी कार्ल मार्क्स ने मजदूरों पर पर भी अपने विचार रखे थे। उन्होंने मजदूरों के संदर्भ में बताया कि उनके बीच भेदभाव होता है। कार्ल मार्क्स की पत्रकारिता में भी रुचि थी। उन्होंने राइनिशे जाइटूँग नामक अखबार भी निकाला था जिसमें उन्होंने पूंजीवाद के खिलाफ क्रांतिकारी विचार प्रस्तुत किये थे। इसी कारण जर्मन सरकार ने अखबार पर सेंसरशिप लगा दी थी।

कार्ल मार्क्स का मानना था कि अमीर और गरीब के बीच की खाई कम होनी चाहिए। समानता का अधिकार कार्ल मार्क्स के मुख्य विचार में से एक था। उनके लिखे मुख्य ग्रन्थों में दास कैपिटल, द क्रिटीक ऑफ पोलिटिकल इकॉनमी आते है। वर्ष 1867 में प्रकाशित हुई दास कैपिटल को समाजवाद की बाईबल भी कहते है। कार्ल मार्क्स ने पूंजीवाद के खिलाफ साम्यवादी घोषणा पत्र (कम्युनिस्ट घोषणा पत्र) भी जारी किया था।

कम्युनिस्ट घोषणा पत्र में उन्होंने अपना प्रसिद्ध नारा “दुनिया के मजदूरों एक हो जाओ” दिया था। पूंजीवाद के नाश का संकल्प भी कार्ल मार्क्स ने अपने इस घोषणा पत्र में दिया था। उन्होंने अपने इस ऐतिहासिक घोषणा पत्र में वर्ग संघर्ष की बात की थी। यही सबसे बड़ा कारण था कि उनकी आलोचना भी होती है।

कार्ल मार्क्स का इतिहास History Of Karl Marx In Hindi –

विश्व में कार्ल मार्क्स (Karl Marx) के विचारों और आंदोलनों का व्यापक प्रभाव हुआ था। कार्ल मार्क्स की आलोचना और सराहना दोनों होती है। कार्ल मार्क्स पूंजीवाद के घौर आलोचक थे। इस कारण उनकी आप आलोचना कर सकते है। परन्तु उनके क्रांतिकारी विचारों और पूंजीवाद के बढ़ते प्रभाव के हानिकारक परिणाम को आप नकार नही सकते है। मजदूर वर्ग के उत्थान के लिए कार्ल मार्क्स ने हमेशा कार्य किया था। कार्ल मार्क्स के सिध्दांतों और विचारों का अध्ययन आज भी दुनियाभर के विश्वविद्यालयों में किया जाता है।

कार्ल मार्क्स की मृत्यु लंदन में 13 मार्च, 1883 में हुई थी। कार्ल मार्क्स को समाजवाद का जन्मदाता भी कहा जाता है। उन्होंने विश्व को बताया कि पूंजीवाद से अमीर और ज्यादा अमीर हो रहा है जबकि गरीब और ज्यादा गरीब हो रहा है। इसका हल उन्होंने साम्यवाद को बताया था।

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