Bhaskaracharya In Hindi भास्कराचार्य की जीवनी व योगदान

यह आर्टिकल Bhaskaracharya In Hindi भास्कराचार्य की जीवनी (Bhaskaracharya Biography In Hindi) और उनके योगदान पर है। भास्कराचार्य भारत के महान विद्वान ज्योतिषी और गणितज्ञ थे। इनको भास्कर द्वितीय के नाम से भी जाना जाता है। खगोल, ज्योतिष और गणित में इनका महान योगदान है। तो आइए, भास्कराचार्य की जीवनी और योगदान को जानने का प्रयास करते है।

Bhaskaracharya In Hindi

भास्कराचार्य की जीवनी Bhaskaracharya In Hindi

गणितज्ञ भास्कराचार्य (Bhaskaracharya) का जन्म महाराष्ट्र राज्य का परभानी इलाका माना जाता है। उनका जन्म शताब्दी वर्ष 1114 माना जाता है। उनके पिता का नाम महेश्वर भट्ट था जिनको वेदों और शास्त्रों का ज्ञान था। भास्कराचार्य जी को शुरुआती शिक्षा का ज्ञान अपने पिता से ही मिला था।

भास्कराचार्य की कर्मभूमि उज्जैन मानी जाती है क्योंकि इतिहास में यह भी आता है कि वो उज्जैन की वेधशाला के प्रमुख भी थे।

भास्कराचार्य ने गुरुत्वाकर्षण के बारे में भी बताया था। उन्होंने अपने ग्रन्थ सिद्धांत शिरोमणि में लिखा कि “पृथ्वी आकाशीय प्रदार्थो को विशिष्ट शक्ति से अपनी और खिंचती है। इस कारण आकाशीय पिंड पृथ्वी पर गिरते है। वैसे गुरुत्वाकर्षण की खोज का श्रेय न्यूटन को दिया जाता है लेकिन न्यूटन से भी बहुत पहले भास्कराचार्य जी ने गुरुत्वाकर्षण को बता दिया था।

महान ग्रँथ सिद्धांत शिरोमणि और योगदान Siddhanta Siromani In Hindi –

भास्कराचार्य (Bhaskaracharya) को उनके लिखे महान ग्रँथ सिद्धांत शिरोमणि (Siddhanta Siromani) से जाना जाता है। जब उन्होंने इस पुस्तक को लिखा था तब उनकी उम्र केवल 36 वर्ष थी। भास्कराचार्य जी ने ग्रँथ को सँस्कृत भाषा में लिखा था। इस पुस्तक में गणित और ज्योतिष के बारे में बताया गया है। सिद्धांत शिरोमणि में मुख्यतः चार भाग लीलावती, बीजगणित, ग्रहगणित, गोलाध्याय है।

प्रत्येक भाग एक पुस्तक की तरह है जिसमे कई अध्याय है। लीलावती खण्ड में उन्होंने अपनी पुत्री लीलावती को सम्बोधित करते हुए ग्रहों की चाल और गणित की व्याख्या की थी।  उन्होंने चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण की व्याख्या करते हुए लिखा की जब चन्द्रमा सूर्य को ढक लेता है तो सूर्यग्रहण होता है। जब पृथ्वी की छाया चन्द्रमा को ढक लेती है तो चन्द्रग्रहण होता है। इस खंड में कुल 13 अध्याय है। बीजगणित के 12 अध्याय है जबकि गोलाध्याय और ग्रहगणित में खगोल विज्ञान को बताया गया है।

सिद्धांत शिरोमणि को समझाने के लिए उन्हीने एक टीका वासनाभाष्य की रचना की थी। इसके अलावा भास्कराचार्य जी ने पंचाग की किताब करणकुतुहल भी लिखी थी।

भास्कराचार्य का जीवन परिचय Bhaskaracharya Biography In Hindi –

गणितज्ञ भास्कराचार्य (Bhaskaracharya) जी ने सूर्यग्रहण और चन्द्रग्रहण को भी समझाया था। उन्होंने गणित में यह भी बताया था कि किसी भी संख्या को शून्य से भाग देने पर अनन्त आता है। बीजगणित के क्षेत्र में चक्रवाल विधि दी थी।

भास्कराचार्य जी का निधन 1185 के आसपास का माना जाता है। महान गणितज्ञ भास्कराचार्य का जीवन पूरी तरह से गणित, ज्योतिष, खगोल को समर्पित था। उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

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Note – इस पोस्ट Bhaskaracharya In Hindi में भास्कराचार्य की जीवनी (Bhaskaracharya Biography In Hindi) और सिद्धांत शिरोमणि (Siddhanta Siromani) पुस्तक के बारे में जानकारी कैसी लगी। यह पोस्ट “Bhaskaracharya Information In Hindi” अच्छी लगी हो तो इसे शेयर भी करे।

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