शाहजहाँ की जीवनी इतिहास Shahjahan History In Hindi

यह पोस्ट Shahjahan History In Hindi मुग़ल बादशाह शाहजहां के जीवन पर आधारित है। शाहजहां मुग़ल सल्तनत के 5 वे बादशाह थे जिनके शासनकाल को स्वर्णिम युग कहा जाता है। शाहजहाँ के पिता बादशाह जहांगीर थे जिनको इतिहास में मोहम्मद सलीम के नाम से भी जाना जाता है।

अपनी पत्नी की याद में दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारत ताजमहल बनवाने के लिए शाहजहाँ को याद किया जाता है। वर्ष 1628 में शाहजहाँ ने मुग़ल साम्राज्य की गद्दी सम्भाली थी। शाहजहाँ एक बुद्धिमान, दानवीर और बहादुर शासक थे।

Shahjahan In Hindi

शाहजहाँ का जीवन परिचय Shahjahan In Hindi

शाहजहाँ Shahjahan का जन्म 5 जनवरी 1592 को लाहौर में हुआ था। उनके पिता जहांगीर जिनकी यह दूसरी सन्तान थे। माता का नाम जगत गौसाई था। इतिहास में शाहजहां की पत्नी के रूप में “मुमताज महल” का जिक्र सबसे पहले आता है। मुमताज महल का असली नाम अर्जुमंद बानो बेगम था। शाहजहां अपनी पत्नी मुमताज से बहुत ज्यादा प्रेम करते थे। बच्ची को जन्म देने के वक्त मुमताज महल की मृत्यु हो गयी थी। शाहजहां को मुमताज से इतना प्रेम था कि उन्होंने उनकी याद में ताजमहल का निर्माण करवाया। ताजमहल मुमताज महल का मकबरा था। मुमताज के अलावा बादशाह की और भी शादियां हुई थी।

बादशाह शाहजहाँ के चार जीवित पुत्र थे। शाहजहाँ का सबसे बड़े बेटे का नाम दारा शिकोह था जो कि विद्वान था। उसने गीता, उपनिषद का पारसी में अनुवाद किया था। दूसरे पुत्र का नाम औरंगजेब था जो शाहजहाँ के बाद तख्त पर बैठा था। उसके दो अन्य पुत्रो के नाम शाहशुजा और मुरादबख्स था। शाहजहां की तीन जीवित पुत्रियां थी जिनमे जहाँआरा सबसे बड़ी थी और शाहजहाँ को सबसे प्रिय थी।

जहांगीर की मृत्यु के बाद द्वार बख्स को गद्दी पर बैठाया गया था। लेकिन शाहजहाँ ने युद्ध लड़कर द्वारबख़्स को हरा दिया। 24 फरवरी, 1628 को वह मुग़ल साम्राज्य का शासक बना।

शाहजहाँ का इतिहास Shahjahan History In Hindi –

शाहजहां Shahjahan ने अपने जीवन मे कई युद्ध लड़े थे जिनमें दक्षिण के अहमदनगर को जीतना प्रमुख था। उसने निजामशाह को हराकर अहमदनगर को जीता था। इसके बाद उन्होंने गोलकुंडा से सन्धि की जिससे वहां पर भी उनका शासन हो गया। शाहजहाँ ने बीजापुर के सुल्तान आदिलशाह प्रथम से सन्धि भी की थी। शाहजहाँ मध्य एशिया के राज्य समरकन्द को भी जीतना चाहता था लेकिन बहुत खर्चा करने के बाद भी वह नही जीत पाया। शाहजहाँ ने मुग़ल साम्राज्य की राजधानी आगरा की जगह दिल्ली को बनाया था।

शाहजहाँ के शासनकाल में विद्रोह भी हुए थे। वर्ष 1628 में बुंदेला के राजा जुझार सिंह ने विद्रोह किया था जिसे शाहजहाँ ने कुचल दिया। शाहजहाँ ने हुगली पर आक्रमण करके नमक पर पुर्तगालियों के एकाधिकार को खत्म किया। शाहजहाँ ने अपने शासनकाल के दौरान सजदा प्रथा को समाप्त किया था। उन्होंने इलाही सम्वत को हटाकर हिजरी सम्वत को शुरू किया था।

बादशाह शाहजहाँ के काल को स्थापत्य कला का स्वर्णिम काल कहा जाता है। उन्होंने दिल्ली का लाल किला, ताजमहल, दीवाने आम और दीवाने खास, जामा मस्जिद बनवाई थी। शाहजहाँ के समय राजकोष भरे हुए थे। प्रजा अपने राजा से खुश थी। उन्होंने अकबर की तरह ही शासन चलाया था जिसमें हर वर्ग को समान अधिकार थे। शाहजहाँ के खजाने में बहुमूल्य हीरा कोहिनूर भी था जो गोलकुंडा के वजीर मुहम्मद सैय्यद ने उन्हें उपहार में दिया था। बादशाह तख्ते ताऊज नामक सिंहासन पर बैठते थे।

शाहजहाँ की जीवनी Shahjahan In Hindi –

अब्दुल हमीद लाहौरी राजदरबार के प्रमुख इतिहासकार थे जिन्होंने पादशाहनामा लिखा था। शाहजहाँ संगीत का शौकीन भी था। बादशाह शाहजहां को इतिहास में खर्चीले शासक के रूप में भी जाना जाता है।

शाहजहाँ के बीमार होने पर उसके बेटो के बीच तख्त के लिए सँघर्ष हुआ था। औरंगजेब, दारा शिकोह, मुरादबख्स, शाहशुजा के बीच सत्ता के लिए लड़ाई हुई थी। औरंगजेब ने शाहजहाँ को बंदी बना लिया और बादशाह बन बैठा। औरंगजेब ने दारा शिकोह को 1658 के युद्ध मे हराया था।

आगरा के किले में 8 वर्ष तक बंदी रहते हुए शाहजहाँ की मृत्यु 31 जनवरी, 1666 को हुई थी। शाहजहां के अंतिम दिनों में उनकी पुत्री जहाँआरा ने ही उनकी खिदमत की थी।

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