करवा चौथ कथा और जानकारी Karva Chauth Katha In Hindi

Karva Chauth Katha In Hindi करवा चौथ की जानकारी

यह पोस्ट करवा चौथ कथा Karva Chauth Katha In Hindi और करवा चौथ की जानकारी पर है। करवा चौथ का त्यौहार भारतीय त्यौहारों में विशेष महत्व रखता है। यह त्यौहार एक व्रत है जो भारतीय स्त्री अपने पति के लिए रखती है। हिन्दू भारतीय नारी अपने पति की लंबी आयु और सुख समृद्धि के लिए इस व्रत का निर्वाह करती है।

यह त्यौहार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। करवा चौथ पूरे उत्तर भारत मे बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाये व्रत रखती है और रात को चन्द्रमा के दर्शन करके ही व्रत तोड़ती है। करवा चौथ में करवा का अर्थ जलपात्र होता है और चौथ का मतलब चतुर्थी से है।

Karva Chauth Katha In Hindi

करवा चौथ कथा Karva Chauth Katha In Hindi

करवा चौथ Karva Chauth के पीछे का इतिहास भी बड़ा रोचक है। वेसे तो करवा चौथ पर कई सारी कहानियां है लेकिन रानी वीरवती की कहानी इनमे प्रमुखता से सुनाई जाती है। रानी वीरवती के कुल 7 भाई थे और वो उनकी एकमात्र बहन थी। अकेली बहन होने के कारण वो सबकी लाडली भी थी। रानी वीरवती का विवाह एक राजा से हो गया। रानी वीरवती अपने भाइयो के घर पर ही थी। एक दिन रानी वीरवती ने अपने पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का उपवास रखा।

रानी रात में चांद का इंतज़ार करती ही रही लेकिन चांद नजर नही आया। रानी वीरवती की जब तबियत बिगड़ने लगी, तो उसके भाइयो को चिंता हुई। बहन को इस तरह से भूख से बेचैन देखा ना गया। रानी के भाइयो ने पीपल के पेड़ के पीछे चन्द्रमा जैसी छाया बनाई जिससे यह लगे की चांद उदय हो रहा हो। वीरवती को यह छाया चन्द्रमा सी प्रतीत हुई और उसने व्रत तोड़ लिया। लेकिन उसी समय एक अनहोनी घट गई और रानी वीरवती के पति की मृत्यु हो गई।

करवा चौथ क्यों मनाया जाता है Karva Chauth Katha In Hindi

रानी अपने पति की मृत्यु से बहुत दुखी हुई और रात भर विलाप करती रही। इसी विलाप के दौरान रात की घनघोर छटा में उसके सामने एक देवी प्रकट हुई। देवी ने वीरवती से कहा कि उसका पति वापस जिंदा हो सकता है। लेकिन तुम्हे यह व्रत वापस रखना होगा और वो भी पूरे समर्पण के साथ। रानी ने देवी के आदेशानुसार करवा चौथ का व्रत वापस रखा। रानी की भक्ति और पति के प्रति प्रेम ने यमलोक के राजा यम को भी विवश कर दिया। राजा यम ने वीरवती के पति को पुनः जीवित कर दिया।

यह व्रत केवल विवाहित स्त्री पर लागू होता है। महिलाएं सूर्योदय से पूर्व भोजन करके अपना व्रत रखती है। पूरे दिन वो भूखी प्यासी रहती है। सुर्यास्त के समय महिलाएं करवा चौथ की कहानी को सुनती है। चन्द्रमा दिखने से पहले महिलाये दुल्हन की तरह सज संवरकर तैयार होती है। उपवास रखने के पश्चात रात को चाँद के दर्शन करके व्रत तोड़ती है।

करवा चौथ की जानकारी Karva Chauth Story In Hindi

व्रत तोड़ने के दौरान भारतीय नारी अपने पति के पास होती है। वह पहले चांद को छलनी में से देखती है और चन्द्रमा को जल अर्पण करती है। चांद की परछाई थाली के पानी मे देखी जाती है। उसके बाद अपने पति को उसी छलनी से देखती है। पति की आरती उतारकर, सदा सुहागिन का आशीर्वाद लेती है। पति अपनी पत्नी को पानी पिलाकर उसका उपवास तोड़ता है।

करवा चौथ Karva Chauth का व्रत सुहागिन नारी का अपने पति के प्रति समर्पण है। पति चाहे कैसा भी हो अच्छा हो या बुरा हो, पत्नी अपने पति के लिए अच्छाई की कामना करती है। पत्नी अपने पति के लिए लम्बी आयु की कामना करती है।

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